मासूमों की मौत पर अब खूब राजनीति की जा रही है

लखनऊ. गोरखपुर के बाबा राघवदास मेडिकल कॉलेज में आक्सीजन नहीं मिलने से तीस मासूम बच्चों की असमय मौत पर अब राजनीति हावी होती जा रही है। योगी सरकार इसे अभी भी आक्सीजन नहीं मिलने से हुई मौत मानने से इनकार कर रही है, जबकि मृतक बच्चों के परिजनों का कहना है कि बच्चों की बिगड़ती हालत देखने के बाद भी अस्पताल प्रशासन आक्सीजन की व्यवस्था करने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। 9 अगस्त से 11 अगस्त के बीच 48 घंटों में 30 मासूम बच्चों की मौत हो गई। इंसेफेलाइटिस से ग्रसित बच्चों को आॅक्सीजन की जरूरत थी लेकिन आक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी ने आक्सीजन की सप्लाई रोक दी थी। बताया जाता है कि कंपनी का 70 लाख रुपए का बकाया है।

असंवेदनहीन स्वास्थ्य मंत्री

-मासूमों की मौत पर अब खूब राजनीति की जा रही है। कल से ही सरकार के सीनियर मंत्री बेतूके बयान दे रहे हैं। रमापति शास्त्री का कहना है कि गोरखपुर से उनका कोई लेना देना नहीं है।
-स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह, जो हर छोटी मोटी घटनाओं पर बयान देने को तैयार रहते हैं, 30 बच्चों की मौत पर उनका बयान कई घंटों बाद आया। सिद्धार्थनाथ सिंह अब भी यह मानने को तैयार नहीं है कि आक्सीजन की कमी से मौतें हुई है।
-उन्होंने अस्पताल प्रशासन का बचाव करते हुए कहा कि जांच की जा रही है। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। 30 मौतों के बाद भी जांच करने की बात लोगों को पच नहीं रही है।
-कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल गोरखपुर के बीआरडी कॉलेज पहुंच गया है। प्रतिनिधिमंडल में गुलामनबी आजाद, राजबब्बर और आरपीएन सिंह शामिल हैं।
-वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने शुक्रवार को समाचार प्लस से बातचीत में कहा कि ये लापरवाही से मौतें नहीं है, बल्कि बच्चों की हत्याएं की गई हैं। इन मौतों के लिए योगी सरकार पूरी तरह जिम्मेदार है।
-समाजवादी पार्टी ने भी आज गोरखपुर में मौके का जायजा लेने के लिए आज एक प्रतिनिधिमंडल भेजने का फैसला किया है। शुक्रवार को पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने ट्वीट कर बच्चों की मौतों पर दुख जताया था।