बच्चे की आंख से निकलता है खून, बडे़-बड़े अस्पताल भी नहीं निकाल पाए इलाज

आजमगढ़ः यहां 12 वर्ष के एक बच्चे की आंख से रोजाना खून के आंसू निकलने के रहस्य को अभी तक कोई सुलझा नहीं पाया है। बच्चे की इस अजीबोगरीब बीमार से जहां उसके परिजन बुरी तरह से परेशान हैं वहीं मेडिकल साइंस के लिए भी चुनौती बनी हुई है। करीब तीन साल पहले एक सामान्य बीमारी के बाद से शुरू हुए इस रोग के इलाज के लिए परिवार वाले आजमगढ़, वाराणसी, गोरखपुर से लेकर लखनऊ के संजय गांधी पीजीआई तक ले गए लेकिन इस अबूझ पहेली को अभी तक कोई नहीं सुलझा पाया है।

खुद सीएमओ आजमगढ़ भी तमाम संभावनाओं के बाद भी इस मर्ज के ठीक होने को चुनौती ही बता रहे। वहीं लाखों का इलाज कराकर आर्थिक रुप से टूट चुके परिजन अब सरकार से दिल्ली के एम्स में इलाज के लिए गुहार लगा रहे हैं। 
आजमगढ़ शहर के लक्षिरामपुर गांधीनगर कालोनी में किराए के मकान में पीड़ित बालक शिखर द्विवेदी के परिवार में उसके माँ-पिता के अलावा एक बड़ी बहन भी है।

मां ममता द्विवेदी एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाती हैं जबकि पिता भी एक दवा के डिस्ट्रिब्यूटर के यहाँ कर्मचारी हैं। बहुत ही सीमित आय में बच्चे के इस खतरनाक बीमारी को देख अपना सब कुछ न्योछावर कर रहे हैं। 
मां ममता द्विवेदी का कहना है कि जहां भी आशा की किरण दिखाई देती है वहां जाकर इलाज कराते हैं लेकिन अभी तक निराशा ही हाथ लगी है। लखनऊ पीजीआई में एमआरआई के आलावा अन्य भी जांच हो चुकी है लेकिन अभी तक बात वहीं की वहीं है।

पीड़ित बच्चा खाना भी ठीक से नहीं खा रहा और दो से तीन दिन तक कुछ नहीं खा पाता। पीड़ित शिखर का कहना है कि जब भी खून आने वाला होता है तो उसकी आँख में दर्द होता है और शरीर भी असहज हो जाता है। खून निकलने के बाद थोड़ा आराम मिलता है।

पढ़ाई करने व टीवी देखने में काफी दिक्कत होती है। घर पर टीवी भी नहीं है। उसकी बहन के अनुसार भाई की बीमारी के चलते सभी लोग परेशान है। पड़ोस में रहने वाले भी किसी प्रकार से मदद करते हैं। जिससे इलाज के आलावा आने जाने में कुछ मदद हो सके। 

मामले में सीएमओ का कहना है कि कई बार नाखून लगने से या नाजुक नसों के रप्चर होने से खून आ सकता है। लेकिन पीजीआई के चिकित्सक भी कुछ बता नहीं पा रहे हैं। यह अबूझ पहेली है।