अयोध्या में 20 सालों से रामलला की सेवा और सुरक्षा में लगे हैं तीन मुस्लिम युवक

अयोध्याः आज से सुप्रीम कोर्ट में राममंदिर विवाद पर रोजाना सुनवाई  शुरू हो रही है। एक ओर जहां राजनीतिक दल अयोध्या विवाद को लेकर राजनीतिक रोटियां सेंकेने में  लगे हैं, वहीं अयोध्या में कई मुसलमान है जो रामलला की सेवा और सुरक्षा में लगे हुए हैं।

पिछले 20 वर्षों से जब भी यहां रामजन्मभूमि पर बने रामलला के अस्थाई मंदिर में आंधी-तूफान आता है तो पीडब्ल्यूडी विभाग को अब्दुल वहीद की याद आती है। 38 वर्षीय इस वेल्डर ने न जाने कितनी बार रामलला के अस्थाई मंदिर की मरम्मत की है। 

अपनी वेल्डिंग करने वाली मशीन, गैस कटर और लोहे लक्कड़ लेकर वहीद हमेशा रामलला के मंदिर की सुरक्षा के लिए तैयार रहता है। पीडब्ल्यूडी की ओर से उसे प्रति दिन 250 रुपए मेहनताना के हिसाब से दिया जाता है।

एक और शख्स है सादिक अली। सादिक अयोध्या में कुर्ते, पगड़ी और पाजामा आदि सिलते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि रामलला के वस्त्र को सादिक तैयार करता है।

रामजन्मभूमि मंदिर के मुख्य पुजारी के कहने पर उसने अबतक कई बार रामलला के वस्त्र को बना चुका है। सादिक का कहना है कि राममंदिर को लेकर सियासतदान उलझे हुए हैं, हमारे लिए तो मंदिर यही है। और श्रीराम सिर्फ हिन्दुओं के लिए बल्कि सभी हिन्दुस्तानियों के लिए है।

इतना ही नहीं, सादिक अली के मित्र मेहबूब के पानी के मोटर से सीता कुंड के पास सार्वजनिक रसोई के लिए पानी भरा जाता है। मेहबूब ने बताया कि रामजन्मभूमि के पास सीता कुंड है। वहां हर रोज आम दर्शनार्थियों के लिए भोजन बनाने का काम होता है। यह काम 1995 से हो रहा है।

इसके लिए उन्होंने खुद अपने पैसे से पानी का मोटर लगाया। मेहबूब रामलला विराजमान और आसपास में बिजली के कामों को देखता है।

उन्होंने बताया कि वे पिछले तीस सालों से यहां काम कर रहे हैं। कभी कोई दिक्कत नहीं हुई। मेहबूब ने बताया कि 2005 में जब लश्कर ए तौएबा के आतंकवादियों ने जीप को दौड़ाते हुए रामलला के मंदिर पर ग्रेनेड से हमला किया था, तब वह वहीं मौके पर था।

उसके बाद प्रशासन और सीआरपीएफ की ओर से लोहे का बैरियर बना दिया गया। सीआरपीएफ के जवानों के साथ वह भी चैबीसों घंटे रामलला की सुरक्षा के लिए मुस्तैद रहता है।