बसपा पार्षद ने कहा, हर्गिज वंदेमातरम नहीं बोलूंगा, उर्दू में शपथ दिलाने की मांग रखी

अलीगढ़ः निकाय चुनाव में दूसरी बड़ी पार्टी के रूप में बसपा के उभरने से बीजेपी की परेशानी बढ़ गई है। अब नगर निगम और जिला पंचायतों के चलाने में दोनों दलों के बीच खींचतान होनी लाजिमी है।

मेरठ में बसपा मेयर द्वारा बोर्ड बैठकों में वंदेमातरम गाने की अनिवार्यता को समाप्त किए जाने से उत्पन्न विवाद अभी चल ही रहा है कि यहां के बसपा के एक पार्षद ने उर्दू में शपथ लेने का आग्रह कर नए विवाद को जन्म दे दिया। 

बसपा पार्षद ने नगर आयुक्त को एप्लिकेशन देकर  उर्दू में शपथ दिलाए का आग्रह किया है। पार्षद का कहना है कि वह किसी भी कीमत पर वंदेमातरम नहीं बोलेंगे ।

अलीगढ़ के वार्ड-54 से जीतकर आये बसपा पार्षद मुशर्रफ हुसैन महजर ने नगर आयुक्त को पत्र लिखकर उर्दू में शपथ दिलाए जाने की मांग रख दी। 

उन्हेंने कहा कि ये मेरा अधिकारिक हक है। शपथ तो कोई किसी भी भाषा में ले सकता है। जब हमारे देश के रुपयों पर उर्दू भाषा का शब्द अंकित हो सकता है तो मुझे उर्दू में शपथ भी दिलाई जा सकती है।

उन्होंने कहा कि वे किसी भी सूरत में सदन में वंदेमातरम नहीं बोलेंगे। ये मेरे मजहब में नहीं है। इस्लाम हमें ये नहीं सिखाता। इस्लाम में अल्लाह के अलावा किसी की वंदना नहीं की जा सकती है। वहीं वार्ड-26 से जीत कर आये बीजेपी के हेमंत गुप्ता ने संस्कृत में दिलाने की मांग कर दी। उन्होंने कहा कि जब कोई पार्षद उर्दू में ले सकता है तो मुझे भी संस्कृत में शपथ दिलाई जाये ।

शहर के कई लोगों का कहना है कि हिन्दुस्तान में रहने वाला नागरिक चाहे किसी भी मजहब से हो,वह पहले एक हिंदुस्तानी है और हिंदुस्तानी का फर्ज बनता है कि वो अपने देश के राष्ट्रगीत और राष्ट्र भाषा का सम्मान करें।