निर्भया की मां ने बयां की पीढ़ा, 'वह 13 दिन और 5 साल एक समान है'

नई दिल्लीः 16 दिसंबर वही दिन जब दिल्ली में निर्भया के साथ सामूहिक दुराचार हुआ था। 5 साल बाद भी निर्भया की मां उस दिन और उसके बाद 13 दिनों तक निर्भया के जीवन और मौत के बीच संघर्ष को भूल नहीं पाई। आज निर्भया के द्वारिका स्थित घर पर वह सभी मोमेंटो रखे हैं जो निर्भया की लड़ाई को आने वाले कई सालों तक जिंदा रखे हुए थे, लेकिन निर्भया की मां याद करते हैं अपनी बेटी को और शहीद ए आजम भगत सिंह की तस्वीर... निर्भया की मां से समाचार प्लस ने बात की। 

आज भी लड़ रही हूं संघर्ष को

मेरे लिए वह 13 दिन और 5 साल एक समान है। उन 13 दिनों के संघर्ष को मैं आज तक लड़ रही हूं । निर्भया के कातिलों को जिंदा नहीं होना चाहिए था, लेकिन आज भी सुप्रीम कोर्ट में उन की दया याचिका है। यानी मानसिक से लेकर न्यायिक तौर पर मेरा संघर्ष 5 साल बाद भी जारी है।

आधी आबादी अभी भी असुरक्षित

5 साल पहले दिल्ली की सड़कों पर जो लोग हमारे साथ खड़े थे, आज वह दिल्ली की सरकार में है। विपक्ष सत्ता में आ गया सत्ताधारी विपक्ष में बैठ गए। बहुत से कानून बदले, बहुत से कानून बने लेकिन, आज भी देश की आधी आबादी खुद को सुरक्षित नहीं समझती। मुस्लिम महिलाएं हो या हिंदू महिलाएं महिलाओं का सम्मान होना चाहिए। उनके प्रति अपराध रुकनी चाहिए, लेकिन हमारे देश के नेताओं को आधी आबादी की याद सिर्फ चुनाव से पहले आती है वो भी एक वोट बैंक के तौर पर..

बेटी की शहादत के बाद आंदोलन

मुझे अपनी बेटी पर गर्व है कि, उसकी शहादत के बाद देश में एक बड़ा आंदोलन शुरू हुआ। बहुत कुछ बदला लेकिन बहुत कुछ बदलना अभी बाकी है और यह बदलाव सिर्फ सरकार और राजनीति के स्तर पर नहीं समाज के स्तर पर आना चाहिए। क्योंकि सवाल हमेशा उस लड़की से पूछा जाता है कि तुम उस वक्त उस सड़क पर क्या कर रही थी? कभी उस वहशी दरिंदे आदमी से नहीं पूछा गया कि वह शराब पीकर उसके साथ बलात्कार क्यों कर रहा था? समाज को अपने अंदर परिवर्तन लाना होगा तभी निर्भया की शहादत रंग ला सकती है।