लालू यादव को सजा सुनाने वाले सीबीआई जज खुद न्याय के लिए प्रदेश में भटक रहे हैं

जालौनः चारा घोटाले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को 3.5 साल की सजा देकर   सुर्खियों में आए रांची सीबीआई कोर्ट के जज शिवपाल सिंह आजकल खुद न्याय के लिये जालौन में अधिकारियों के यहां चक्कर काट रहे हैं।

सीबीआई जज शिवपाल सिंह अपनी पैतृक जमीन को कब्जा मुक्त कराने के लिये कई बार अधिकारियों के यहां चक्कर लगा चुके हैं। लेकिन अधिकारी उनकी समस्या पर तनिक भी गौर नहीं कर रहे जिससे जज के साथ उनका परिवार भी परेशान घूम रहा है।

मामला रांची की सीबीआई कोर्ट के जज शिवपाल सिंह की पैतृक जमीन का है। शिवपाल सिंह ने दो दिन पहले ही चारा घोटाले में बिहार के पूर्व सीएम लालू यादव और दूसरे दोषियों को सजा सुनाई है। सीबीआई के जज शिवपाल सिंह जालौन जिले की जालौन तहसील के ग्राम शेखपुर खुर्द के रहने वाले है।

उनकी जमीन पैतृक जमीन भी यही है। जिसमें पूर्व प्रधान द्वारा जबरन आम रास्ता निकाल दिया गया है। जब इसकी जानकारी जज शिवपाल सिंह को हुई तो उन्होने इसकी शिकायत जालौन के तहसीलदार से लेकर एसडीएम से की। जज साहब की शिकायत को अधिकारियों ने प्रार्थना पत्र पर आदेश तो कर दिया है लेकिन उनके वापस रांची पहुंचते ही अधिकारियों ने कार्यवाही बंद कर  दी है। आज भी मामला जस का तस बना हुआ है। 

इस मामले में जज शिवपाल सिंह के भाई सुरेन्द्र पाल सिंह ने बताया कि उनके भाई शिवपाल की जमीन शेखपुर खुर्द में अराजी नंबर 15 और 17 है। जिसके वह संक्रमणीय भूमिधर है, जिस पर पूर्व प्रधान सुरेन्द्र पाल सिंह अपने प्रधान कार्यकाल के दौरान बिना किसी अधिकार के चकमार्ग बनवा दिया। जबकि सरकारी कागजों में चकमार्ग गाटा संख्या 13 है जिसको पूर्व प्रधान ने बंद कर उसे अपने खेत में शामिल कर लिया।

उन्होंने बताया कि कई बार उनके जज भाई तहसीलदार से लेकर जालौन के जिलाधिकारी से मिले लेकिन अधिकारियों ने उनकी समस्या का समाधान नहीं किया और लगातार इसको लेकर परेशान हो रहे है।

इस मामले में जालौन के तहसीलदार जितेंद्र पाल का कहना है कि जज साहब उनके पास आए थे और उनकी बात सुनने के बाद राजस्व टीम को भेजा था और पैमाईश भी कराई थी लेकिन इसके बाद जज साहब का कोई जबाब नहीं आया। उन्होने बताया कि जहां चकरोड़ है वही पर चकरोड़ बनाया जाएगा।

लेकिन जब तहसीलदार से पूछा गया कि कि जज साहब के भाई का कहना कि अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुयी तो तहसीलदार का कहना है टीम भेजी गई थी और निशान लगवाये गए थे लेकिन जज साहब का उसके बाद कोई जबाब नहीं आया और न ही मुझसे मिले।

अब सवाल यह उठता है कि एक जज लोगों को न्याय देने में लगे रहते हैं क्या जालौन प्रशासन अब जज को न्याय दे सकेगा, यह देखने वाली बात होगी।