सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से पहले समलैंगिकता पर बोले मौलाना और हिन्दू धर्मगुरु, 'यह एक अपराध है'

सहारनपुरः समलैंगिकता गुनाह है या नहीं, संविधान पीठ इस पर सुनवाई करने जा रही है। वहीं इस मुद्दे पर देवबंद के हिंदू और मुस्लिम दोनों के ही धर्म गुरुओं ने इसका विरोध किया है। दोनों ही समुदायों के धर्मगुरुओं का कहना है कि यह भारतीय संस्कृति के खिलाफ है। इस तरह की बातें किसी भी धर्म या शास्त्र में नहीं लिखी है।

मुस्लिम धर्मगुरु नदीम उल वाजिदि का कहना है कि इस्लाम धर्म में तो ये बिल्कुल मना है। मर्द का मर्द और औरत का औरत से निकाह नहीं हो सकता और कुरान-ए-करीम में इसकी वजह भी बयान कर दी गई है। यह कहा गया है कि निकाह का मकसद इंसान की नस्ल बढ़ाना है।

नस्ल को आगे बढ़ाने के लिए निकाह किया जाता है। नस्ले सिर्फ इसी सूरत में बढ़ सकती है जब किसी मर्द का औरत से निकाह हो। मर्द का मर्द से निकाह होने की सूरत में या औरत की औरत से शादी होने की सूरत में यह मकसद पूरा नहीं होता और जहां तक हम समझते हैं कि किसी भी आसमानी मजहब में इसकी इजाजत नहीं है। 

उन्होंने कहा कि जहां तक हमारा ख्याल है हिंदू मजहब भी इसकी इजाजत नहीं देता है। इस्लाम धर्म में यह एक जुर्म है और मर्द का मर्द से हमबिस्तर होना भी जुर्म है। कुरआन-ए-करीम में इसकी सजा भी बताई गई है, इस्लाम से पहले जो पैगंबर थे उनकी कौमों में इस तरह का रिवाज था। तो उन्हें सख्त सजा दी गई थी उनकी बस्तियां तक उलट दी गई थी।

वही हिंदू धर्मगुरु जितेंद्र शर्मा ने समलैंगिक विवाह के बारे में विरोध करते हुए कहते हैं कि समलैंगिक विवाह के बारे में जो प्रस्ताव चल रहा है एकदम गलत है। हिंदू संस्कृति के आधार पर यह अमान्य है, यह उचित नहीं है ना तो हमारे लिए ठीक है और हमारे शास्त्रों में कहीं भी यह उचित नहीं है। 

यह विदेशी कल्चर है इंडिया से बाहर क्या होता है। वो एक अलग कल्चर है वह हमारे हिंदुस्तान पर नहीं थोपनी चाहिए और ना ही यह होना चाहिए यह हिंदू धर्म के साथ एकदम गलत होगा जो किसी भी रुप में उचित नहीं है ।