चारा घोटाले के तीसरे मामले में लालू यादव और जगन्नाथ मिश्र को पांच साल की सजा, 5 लाख रुपए का जुर्माना भी

रांचीः बिहार में चारा घोटाले के एक और मामले में राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव को दोषी करार दिया गया है। बुधवार को रांची की सीबीआई कोर्ट ने चाईबासा कोषागार से 33.67 करोड़ रुपये की अवैध निकासी मामले में लालू यादव समेत 12 को दोषी करार दिया गया है।

इससे पहले देवघर कोषागार से अवैध तरीके से धन निकालने के मामले में भी लालू यादव को दोषी करार दिया गया था। दूसरे मामले में उन्हें 3.5 साल की सजा सुनाई गई है। सजा की सुनवाई पर बहस आज ही हो सकती है। इस मामले में लालू यादव को अधिकतम 7 साल की कारावास की सजा हो सकती है। 

सीबीआइ के विशेष न्यायाधीश एसएस प्रसाद की अदालत ने दस जनवरी 2018 को सुनवाई पूरी करते हुए फैसले के लिए तिथि निर्धारित की थी। चाईबासा कोषागार से 33 करोड़, 67 लाख 534 रुपये की अवैध निकासी को लेकर चारा घोटाला कांड संख्या आरसी 68ए-96 के तहत प्राथमिकी दर्ज है।

निकासी 1992 से 93 के बीच हुई थी। राजनीतिक नेता, पशुपालन अधिकारी व आइएएस अधिकारियों की मिलीभगत से 67 जाली आवंटन पत्र पर 33 करोड़ 67 लाख 534 रुपये की निकासी कर ली। जबकि मूल आवंटन 7.10 लाख रुपये ही था। वरीय विशेष लोक अभियोजक बीएमपी सिंह ने सीबीआइ की ओर पक्ष रखा।

उन्होंने सीबीआइ की ओर से 203 लोगों की गवाही न्यायालय में दर्ज कराई। मामले की सुनवाई में बचाव की ओर से 23 गवाहों को प्रस्तुत किया गया। इसमें लालू प्रसाद की ओर से 17 लोगों की गवाही दर्ज कराई गई। इसके अलावा दस्तावेजों को प्रस्तुत किया गया। 

चाईबासा कोषागार से अवैध निकासी से संबंधित मामले में 12 दिसंबर 2001 को 76 आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की गयी थी । ट्रायल के दौरान 14 आरोपियों का निधन हो चुका है। वहीं तीन सरकारी गवाह बन गए। दो आरोपियों ने दोष स्वीकार कर लिया।

दोष स्वीकार करने वाले अभियुक्त सुशील कुमार झा व प्रमोद कुमार जासवाल को अदालत से पूर्व में सजा सुनाई जा चुकी है। वहीं एक आरोपी फूल सिंह अब तक फरार हैं। इस  मामले में कुल 56 आरोपी ट्रायल फेस कर रहे हैं। इसमें लालू प्रसाद, डॉ. जगन्नाथ मिश्रा सहित छह राजनीतिक नेता, तीन आइएएस अधिकारी, छह पशुपालन पदाधिकारी, कोषागार पदाधिकारी सिलास तिर्की और 40 आपूर्तिकर्ता शामिल हैं।