20 साल में एसबीआई को लगा पहला तगड़ा झटका, अक्टूबर-दिसंबर में 2416 करोड़ का घाटा

नई दिल्लीः देश के सबसे बड़े सार्वजनिक बैंक स्टेट बैंक आॅफ इंडिया को 2017 की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में 2416 करोड़ रुपये का जबरदस्त घाटा हुआ है। दो दशक में बैंक का यह पहला तिमाही  घाटा है। बैंक के फंसे हुए कर्ज (बैड लोन) और प्रोविजन में भारी इजाफा होने की वजह से इसे भारी-भरकम घाटे का सामना करना पड़ा है।

आरबीआई की ओर से बैंक के 23,000 करोड़ रुपये को एनपीए के खाते में डालने के निर्देश के बाद   घाटा रिकार्ड स्तर पर पहुंच गया। 

दरअसल, यह रकम पावर सेक्टर की कंपनियों को दिया गया कर्ज है, जहां ये फंसा हुआ है। पावक कंपनियों की ओर से इस कर्ज को चुकाने का कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है।

आंकड़ों के मुताबिक अक्टूबर-दिसंबर तिमाही 2017 का शुद्ध घाटा 2416 करोड़ रुपये का रहा। जबकि एक साल पहले बैंक को 1820 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था। बैंक को यह बड़ा झटका है, क्योंकि इसके पहले यह वेतन बढ़ोतरी और सहयोगी बैंकों के विलय के मद में 700 करोड़ रुपये की प्रोविजनिंग कर चुका था।

इसके अलावा बांड यील्ड बढ़ने से भी बैंक को बड़ा नुकसान हुआ है। इससे इसके बांड वैल्यू में 2000 करोड़ रुपये की गिरावट आ चुकी है। इस वजह से बैंक को ज्यादा प्रोविजनिंग करनी पड़ी। साथ ही सिक्यूरिटी कारोबार का मुनाफा भी 4900 करोड़ रुपये से घट कर 1026 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। इन सारे हालातों ने बैंक के लिए घाटे का पहाड़ खड़ा कर दिया।

बैंकों का बढ़ा हुआ एनपीए और उनका लगातार घाटे में जाना सरकार के लिए सिरदर्द बना हुआ है। एनडीए सरकार ने बैंकों के रीकैपिटलाइजेशन का इरादा जताया है लेकिन अभी वह इस पर बड़ा कदम नहीं उठा सकी है। 

वित्त मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक सितंबर 2017 को खत्‍म तिमाही में सरकारी बैंकों का एनपीए बढ़ कर 7,33,974 करोड़ रुपये हो गया था जबकि निजी बैंकों का एनपीए 1,02,808 करोड़ रुपये था। पूरे बैड लोन में काफी काफी बड़ा हिस्सा बड़ी कंपनियों और दूसरी कॉरपोरेट घरानों का है। डूबे हुए कर्ज का 77 फीसदी कॉरपोरेट के पास है।

वित्त मंत्रालय ने कहा है कि फंसे या डूबे हुए कर्ज की रिकवरी के लिए ट्रिब्यूनलों की संख्या बढ़ाई गई है। पिछले साल इनकी संख्या 33 थी। मंत्रालय ने उम्मीद जाहिर की है कि सरकार के इस कदम से फंसे कर्जों की रिकवरी तेज होगी।