नई दिल्ली (NNI Live) :- भगवान श्रीकृष्ण का मंगलवार आधी रात प्राकट्य हो गया। श्रीकृष्ण के जन्म होते ही उत्तर प्रदेश में गृहस्थों के घर और देवालयों में महिलाएं सोहर गीत गाने लगीं और शहनाई की धुन पर खुशियां मनाई जाने लगीं। भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को आज गृहस्थ लोगों के घर में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। वहीं वैष्णव साधु-संत बुधवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाएंगे।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व को लेकर राजधानी लखनऊ सहित प्रदेश के विभिन्न नगरों में आज सुबह से ही गृहस्थों द्वारा पूजन अर्चन का कार्यक्रम चल रहा था। रात के 12 बजते पूजा स्थलों पर शंखध्वनि गूजने लगी। महिलाएं सोहर गीत गाने लगीं। कान्हा के प्रगट होते ही लोग खड़े होकर उनका स्वागत करने लगे। चारों तरफ मंगलगीत सुनाई देने लगे। पूजा अर्चना के बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।

हालांकि कोरोना के बढ़ते संक्रमण के कारण इस बार जन्मोत्सव पर किसी भी तरह के सार्वजनिक कार्यक्रम नहीं हुए। मंदिरों में भी श्रद्धालुओं को प्रवेश नहीं दिया गया।

कृष्ण जन्मस्थान मथुरा में बुधवार को मनेगी जन्माष्टमी

मथुरा में कृष्ण जन्मस्थान पर भगवान का प्राकट्य 12 अगस्त को मध्य रात्रि होगा। इस अवसर पर कृष्ण नगरी में पूरी दुनिया से लाखों श्रद्धालु इकट्ठा होते हैं। लेकिन कोरोना संकट के कारण इस बार जन्माष्टमी उत्सव ऑनलाइन आयोजित हो रहा है। लोगों को अपने आराध्य के दर्शन व पूजन का अवसर ऑनलाइन ही मिलेगा।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास आज शाम ही अयोध्या से सरयू जल लेकर मथुरा पहुंच गये। उसी पवित्र जल से भगवान श्रीकृष्ण का महाभिषेक किया जाएगा। महंत नृत्य गोपाल दास श्रीकृष्ण जन्मभूमि न्यास के भी अध्यक्ष हैं। वह हर वर्ष इस कार्यक्रम में मथुरा आते हैं। श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सदस्य गोपेश्वर चतुर्वेदी ने का कहना है कि भगवान श्रीकृष्ण के अभिषेक के लिए काशी से मंगाया गया गंगा जल और मथुरा से यमुना जल भी प्रयुक्त होगा। उन्होंने बताया कि श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर इस बार भगवान श्रीकृष्ण का 5247वां जन्मोत्सव मनेगा।

जन्मस्थान के अलावा मथुरा और वृंदावन के लगभग सभी बड़े मंदिरों, मठों एवं आश्रमों में इस बार जन्माष्टमी के लिए भक्तों को ऑनलाइन दर्शन की सुविधा प्रदान की गई है। सोमवार से ही वहां के मंदिरों में जन्मोत्सव का पर्व प्रारम्भ हो गया है। भागवत गीता का प्रसारण भी ऑनलाइन किया जा रहा है।

इस बार जन्माष्टमी पर तीन दिन का बन रहा संयोग

योगिराज भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के रोहिणी नक्षत्र में होता है। लेकिन, इस वर्ष अष्टमी तिथि के साथ रोहिणी नक्षत्र का संयोग नहीं मिल रहा है। ऐसे में जन्माष्टमी का पर्व तीन दिन मनाया जाएगा। अष्टमी तिथि के चलते गृहस्थ लोगों ने आज 11 अगस्त को जन्माष्टमी का पर्व मनाया, जबकि वैष्णव संत बुधवार को मनाएंगे। वहीं रोहिणी नक्षत्र मानने वाले साधक 13 अगस्त को भगवान का जन्मोत्सव मना सकते हैं।

आचार्य डा0 ओमप्रकाशाचार्य के अनुसार आज 11 अगस्त को कृतिका नक्षत्र व मेष राशि में चंद्रमा का संचरण रहा, जबकि 12 अगस्त को कृतिका नक्षत्र के साथ चंद्रमा का संचरण वृष राशि में होगा। वहीं 13 अगस्त को रोहिणी नक्षत्र का संयोग बन रहा है लेकिन अष्टमी तिथि का योग नहीं बन रहा है। डा0 ओमप्रकाशाचार्य का कहना है कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व एक हजार एकादशी का फल देने वाला व्रत है। इसमें पूरी रात जप व ध्यान का विशेष महत्व है।