नई दिल्ली (NNI Live) :- पूर्वी लद्दाख के पैंगोंग झील और गोगरा सेक्टरों में 14 किमी. तक भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ करने के बाद चीन वापस जाने को तैयार नहीं है बल्कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने अब इन इलाकों में ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाकर यहां ‘संचार तंत्र’ मजबूत करने का काम शुरू कर दिया है। भारत और चीन के बीच मेजर जनरल स्तर की छठवें दौर तक की वार्ता नाकाम रही है। 8 अगस्त को हुई इस आखिरी वार्ता में भारत की ओर से साफ कहा गया कि चीन को विवादित क्षेत्रों से अपने सैनिक वापस बुलाने होंगे, वरना ‘किसी भी घटना’ के लिए तैयार रहें।

रक्षा विभाग की जून, 2020 में हुई प्रमुख गतिविधियों के बारे में रक्षा मंत्रालय की वेबसाइट पर एक रिपोर्ट जारी की गई, जिसे मीडिया में आने के बाद वेबसाइट से हटा लिया गया। इसमें पहली बार सेना ने माना है कि 5 मई से एलएसी पर चीनी आक्रमण बढ़ रहा है। चीनियों ने 17-18 मई को कुगरांग नाला, गोगरा और पैंगोंग त्सो झील के उत्तरी तट तक घुसपैठ की है। यह कुगरंग नाला हॉट स्प्रिंग्स के उत्तर में पीपी 16 और पीपी 15 (गोगरा) के पास है। सरकार ने यह भी माना है कि सैन्य और राजनयिक स्तर पर बातचीत पारस्परिक रूप से जारी है और वर्तमान गतिरोध लंबे समय तक रहने की आशंका है। अब जब इन्हीं दोनों विवादित इलाकों में चीनी सेना ने ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाने का काम शुरू कर दिया है तो भारत से तनाव और बढ़ने की ही उम्मीद है।

एलएसी के हॉट स्प्रिंग क्षेत्र में करीब 4 किमी. अंदर आ चुके चीनी सैनिक अब लौटने को तैयार नहीं हैं बल्कि भारत से ही एक किमी. पीछे जाने को कह रहे हैं। यहां चीनी सेना ने 2 किमी. चौड़ा बफर जोन बनाने से इनकार कर दिया है। इसका नतीजा यह है कि पेट्रोलिंग प्वाइंट-15 और 17ए पर दोनों देशों के सैनिक आमने-सामने हैं। पेट्रोलिंग प्वाइंट-15 के पास घुसपैठ करके 3 किमी. तक भारतीय दावा क्षेत्र में सड़क का भी विस्तार किया है। भारतीय सैनिकों को यहां से आगे नहीं जाने दिया जा रहा है। यही हाल भारत के पेट्रोलिंग प्वाइंट-17ए के समीप स्थित गोगरा पोस्ट का है, जहां चीनी सेना भारतीय क्षेत्र में लगभग 2 किमी. घुस आई है। यहां अब भी दोनों ओर से लगभग 1,500 सैनिक टकराव में हैं। गोगरा पोस्ट क्षेत्र में घुसपैठ करने वाले चीनी सैनिकों की नजरें भारत के पेट्रोलिंग प्वाइंट-18, 19, 20, 21, 22 और 23 पर टिकी हैं।

पैंगॉन्ग झील इलाके में चीनियों ने मई के बाद फिंगर-4 से फिंगर-8 तक 8 किलोमीटर के हिस्से पर कब्जा करने के बाद स्थायी ढांचों का निर्माण भी किया है। झील में अतिरिक्त बोट और सेना की टुकड़ी को तैनात किया है। पैंगॉन्ग झील के उत्तरी किनारे पर चीन ने नए कैंप बनाने शुरू कर दिए हैं। पैंगॉन्ग झील में और बोट उतारे जाने की नई चीनी चाल सेटेलाइट में कैद हो गई है, जिसमें यह भी साफ दिख रहा है कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की नौसेना फिंगर-5 और फिंगर-6 में डेरा जमाए हुए हैं। फिंगर-5 पर पीएलए की तीन बोट और फिंगर-6 पर पीएलए की 10 बोट दिखाई दी हैं। हर बोट में 10 जवान सवार हैं यानी फिंगर-4 के बेहद करीब 130 जवान तैनात हैं।

यही वजह है कि भारत और चीन के बीच पैंगोंग झील का उत्तरी तट भी मुख्य समस्या बना हुआ है। चीनी सैनिक अब तक सिर्फ फिंगर-4 से फिंगर-5 पर वापस गए हैं लेकिन पूरी तरह से रिज-लाइन को खाली नहीं किया है। इसी पैंगॉन्ग झील के तट पर दो दिन पहले राष्ट्रीय ध्वज और आईटीबीपी के झंडों के साथ जवानों ने 14 हजार फीट ऊंचाई पर स्वतंत्रता दिवस मनाया। जवानों ने भारत माता की जय और वन्दे मातरम् का काफी देर तक उद्घोष करके कुछ ही दूरी पर कब्जा जमाये बैठे चीनी सैनिकों को सन्देश दिया कि वे यहां अपनी जमीन वापस लेने के लिए मौजूद हैं। भारत की तरफ से साफ कहा गया कि चीन को पैंगॉन्ग एरिया में फिंगर-8 से पीछे जाना होगा लेकिन चीन इस पर बिल्कुल सहमत नहीं है।

कई दौर की सैन्य और कूटनीतिक वार्ताओं के बावजूद चीनी सेना पैंगोंग झील और गोगरा सेक्टरों में घुसपैठ किये जाने वाले 14 किमी. के इलाके को अपना मान बैठी है, इसीलिए इन इलाकों में ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाने की शुरुआत की है। चीनी सेना यहां इंटरनेट की शुरुआत करके गोगरा और पैंगोंग त्सो झील इलाके को बेहतर ‘संचार तंत्र’ से जोड़ना चाहती है ताकि युद्ध की स्थिति में इसका लाभ लिया जा सके। चीन ने 13 अगस्त को भारत से आयातित सिंगल-मोड ऑप्टिकल फाइबर पर डंपिंग रोधी शुल्क को पांच साल के लिए बढ़ा दिया है। ये दंडात्मक शुल्क 7.4 प्रतिशत से 30.6 प्रतिशत के बीच होंगे। सिंगल-मोड ऑप्टिकल फाइबर का इस्तेमाल मुख्य रूप से लंबे समय तक चलने वाले संचार, महानगरीय नेटवर्क, केबल टेलीविजन और फाइबर एक्सेस नेटवर्क के लिए किया जाता है। एलएसी से पीछे हटने के बजाय चीनी सेना की बढ़ रही हरकतें दिनों-दिन परेशान करने वाली हैं।