जयपुर (NNI Live) :- राजस्थान में कोरोना संक्रमण का दायरा फैलने के बाद राज्य सरकार के आदेश पर जिलास्तर पर शुरु किए गए कोरोना बुलेटिन को अब अघोषित आदेश से बंद कर दिया गया है। राज्य के जिलों में अब संबंधित जिला कलक्टर या मेडिकल कॉलेज किसी भी तरह का कोरोना बुलेटिन जारी नहीं कर सकेंगे। जिलों व स्टेट की रिपोर्ट में आ रही आंकड़ों की गफलत के कारण सभी जिलों को मौखिक तौर पर कोरोना संबंधी आंकड़े सार्वजनिक करने की मनाही कर दी गई है।

राजस्थान के सभी 33 जिलों में कोरोना संक्रमण का दायरा फैलने के बाद राज्य सरकार ने परिपत्र जारी कर सभी जिला कलक्टरों को प्रेस ब्रीफिंग कर कोरोना बुलेटिन जारी करने के निर्देश दिए थे। इसकी पालना में अब तक सभी जिलों में स्थानीय स्तर पर कोरोना बुलेटिन जारी किया जा रहा था। हाल के दिनों में जिलों में जारी किए जा रहे बुलेटिन तथा स्टेट की रिपोर्ट के आंकड़ों में गफलत की स्थितियां पैदा होने लग गई। मसलन, जिलों में जारी किए जा रहे कोरोना बुलेटिन के आंकड़े ज्यादा होने लगे, जबकि स्टेट की रिपोर्ट में कोरोना रोगियों के आंकड़े कम होते गए। कोरोना से होने वाली मौतों को लेकर भी गफलत की स्थितियां बनने लगी। जिलास्तर पर जारी कोरोना बुलेटिन में स्थानीय स्तर पर मौत बताई जाती थी, लेकिन कोरोना के स्टेट बुलेटिन में उन मौतों का कोई जिक्र तक नहीं होता था।

बता दें कि एक न्यूज़ एजेंसी  ने 31 अगस्त को तकनीकी खामी से स्टेट और जिलों के बीच ‘गायब’ हो रहे हजारों कोरोना मरीज शीर्षक से समाचार देकर इस पूरी गफलत को उजागर किया था। इसमें बताया गया था कि इसी खामी के कारण बीते दिनों में पूरे राजस्थान से हजारों कोरोना रोगी गायब हो चुके हैं। ये रोगी हकीकत में तो प्रदेश के विभिन्न जिलों में कोरोना का उपचार ले रहे थे, जबकि स्टेट की रिपोर्ट में इनका कोई जिक्र तक नहीं है। प्रदेश के 33 जिलों में रोजाना की जा रही सैम्पलिंग, पॉजिटिव पाए गए केसों के बीच स्टेट और जिलों के मध्य गफलत की स्थिति बनने के कारण अघोषित रूप से जिला स्तर पर जारी किए जाने वाले कोरोना बुलेटिन को बंद कर दिया गया।

आंकड़ों की इसी गफलत के कारण रविवार से सरकार ने सबसे पहले कोटा जिले में सेंसरशिप लागू की। इसके बाद सभी जिला कलक्टरों को मौखिक रूप से किसी भी तरह का कोरोना बुलेटिन जारी नहीं करने के निर्देश दिए।