लॉस एंजेल्स (NNI Live) :- साऊदी अरब के वरिष्ठ पत्रकार जमाल खशोगी (59 वर्ष) की हत्या के सिलसिले में सऊदी अरब की अदालत ने आठ व्यक्तियों को सात से बीस वर्ष की क़ैद की सज़ा सुनाई  है। जमाल खशोगी अमेरिकी दैनिक ‘वाशिंगटन पोस्ट’ के  लिए नियमित कालम लिखता था। वह गत अक्टूबर 2018 में दूसरी शादी के सिलसिले में अपेक्षित दस्तावेज़ों के लिए तुर्की की राजधानी ‘इस्तंबुल’ दूतावास गया था, जहाँ उसकी हत्या कर दी गई थी। इस पर भारत सहित  दुनिया भर में मीडिया में काफ़ी बावेला मचा था।

सऊदी सरकार की अधिकृत संवाद समिति की ओर से जारी एक रिपोर्ट में आरोपितों के नामों की सूची तो नहीं दी गई हैं, लेकिन बताया जा रहा है कि ये सभी उस 15 सदस्यीय गिरोह के सदस्य थे, जिन पर अक्टूबर 2018 में  सऊदी अरब के इस्तांबुल दूतावास में जमाल खशोगी की हत्या के बाद आरोप लगाए गए थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह गिरोह सऊदी अरब से विशेष रूप से तुर्की गया था। इस गिरोह ने बाद में हत्या के सभी सुराग़ मिटा दिए थे। यहाँ तक कि जमाल खशोगी के शव के अवशेष भी हाथ नहीं लगे हैं। बताया जाता है कि जमाल खशोगी सऊदी अरब के प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान का प्रबल आलोचक था।

सऊदी अरब में इस गिरोह को सज़ा दिए जाने के सिलसिले में दुनिया भर में न्यायिक कार्रवाई की पारदर्शिता की माँग की जा रही थी। संयुक्त राष्ट्र मानवीय आधिकार समिति और अनेकानेक संस्थाएँ और आम जनता का न्यायिक प्रक्रिया को ले कर संदेह जताया जा रहा था।

इस न्यायिक रिपोर्ट को लेकर उठाए जा रहे सवालों में यह भी कहा जा रहा है कि जमाल खशोगी के अवशेष और उसकी हत्या का निर्देश देने वाले के बारे में कुछ भी नहें कहा गया है। सीआईए की रिपोर्ट में जमाल खशोगी की हत्या का आदेश दिए जाने वाले व्यक्ति का नाम कोई और नहीं, प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान पर इशारा किया गया है।