मऊ:- जालसाजी और शस्त्र लाइसेंस के मामले में आरोपी सदर विधायक मुख्तार अंसारी को एक सप्ताह के लिए पुलिस रिमांड पर दिए जाने के लिए विवेचक की ओर से सीजेएम कोर्ट में अर्जी दी गई। सीजेएम विनोद शर्मा ने अर्जी पर अभियोजन अधिकारी और मुख्तार अंसारी के अधिवक्ता दाऱोगा सिंह के तर्कों को सुनने तथा कागजातों का अवलोकन करने के बाद विवेचक की पुलिस रिमांड की अर्जी खारिज कर दिया। मामला दक्षिण टोला थाना क्षेत्र का है।

बता दें कि दक्षिण टोला थाना क्षेत्र में जालसाजी और आयुध अधिनियम के बाबत तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक सरायलखंसी निहारनंदन की तहरीर पर मुख्तार अंसारी सहित छह लोगों के विरुद्ध नामजद रिपोर्ट दर्ज हुई । सीजेएम के आदेश पर मामले के विवेचक एसआई सरफराज अहमद ने रूपनगर कारागार पहुंचकर सदर विधायक मुख्तार अंसारी का धारा 161 सीआरपीसी के तहत बयान रिकॉर्ड किया।

बताया है कि गाजीपुर जनपद के मरदह थाना क्षेत्र के सिगेंरा गांव निवासी शाह आलम पुत्र अब्दुल रहमान की दो नाली कारतूसी बंदूक जो उक्त मुकदमे से संबंधित है वह दक्षिण टोला थाना क्षेत्र के डोमनपूरा मोहल्ले में छुपा कर रखा हूं ।वहां चलकर बंदूक बरामद करा सकता हूं । मुख्तार अंसारी के इस बयान के आधार पर विवेचक ने सीजेएम कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर उन्हें बंदूक बरामद करने के लिए न्यायिक अभिरक्षा से सात दिन के लिए पुलिस अभिरक्षा में दिए जाने का अनुरोध किया।

इस पर सीजेएम ने मुख्तार अंसारी के अधिवक्ता दरोगा सिंह को प्रार्थना पत्र की कॉपी देने के बाद सुनवाई की बात कही। अपराहन 1:30 बजे वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से रूपनगर जेल से मुख्तार अंसारी की पेशी हुई। इस दौरान सीजेएम विनोद शर्मा ने विवेचक के प्रार्थना पत्र के बाबत मुख्तार अंसारी को अवगत कराया तो उन्होंने बताया कि वह जेल में निरूद्ध है। न तो उनसे असलहा से कोई संबंध है न वह कहीं छुपा कर रखे हुए हैं। इस दौरान मुख्तार अंसारी के अधिवक्ता दारोगा सिंह ने पुलिस के प्रार्थना पत्र पर आपत्ति प्रस्तुत करते हुए कहा कि उनके जान माल का खतरा है। पुलिस उन्हें रिमांड पर लेकर जान से मार सकती है।

उन्होंने कोर्ट को अवगत कराया कि संबंधित बंदूक शाह आलम ने जिसकी पुलिस मुठभेड़ में वर्ष 2007 में मौत हो चुकी है । वह मौत से पूर्व ही गाजीपुर में बंदूक दुकान पर जमा कर दिया था। इस दौरान उन्होंने दुकान की जमा रसीद भी प्रस्तुत किया। सीजेएम ने प्रार्थना पत्र पर वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी तथा मुख्तार अंसारी के अधिवक्ता के तर्कों को सुनने तथा दोनों पक्षों के कागजातों का अवलोकन करने के बाद विवेचक की मुख्तार अंसारी को पुलिस रिमांड पर दिए जाने के लिए दी गई अर्जी को खारिज कर दिया।