लखनऊ :- कानपुर के कुख्यात विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद अब उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फ़ोर्स अपनी अगली तैयारी में जुट गई है। अगले ऑपरेशन में जेल में बंद माफियाओं के सक्रिय गुर्गों और उनकी गतिविधियों पर लगाम लगाया जायेगा।

सूत्रों की मानें तो जेल में सजा काट रहे यूपी के 25 कुख्यात अपराधी अपने गुर्गों यानी अपने आका के कहने पर रंगदारी, वसूली, लूट, हत्या, धमकी देना, यूपी पुलिस या अन्य विभागों के अधिकारी की जन्मकुंडली निकालने, राजनीतिक गलियारे में पकड़ बनाये रखने जैसे काम करते हैं। जिससे जेल में रहकर भी माफिया बाहर की दुनिया में अपने हर काम करा लेता है। इन गुर्गो की पढ़े लिखे समाज के साथ व्यवसाय से जुड़े लोगों में दहशत बनी रहती है। ये गुर्गे धनउगाही से लेकर ठेकेदारी लेने-दिलवाने व हत्या करने तक घटनाओं को अंजाम देते हैं।

उत्तर प्रदेश में माफियाओं की वैसे तो संख्या 25 है, लेकिन कुछ सूचीबद्ध माफिया पहले किसी माफिया के गुर्गे ही हुआ करते थे। या किसी माफिया गैंग के सदस्य रहे। जो समय के साथ ठेको और सरकारी काम में दखलअंदाजी करके स्वयं माफिया बन बैठे। पहले पायदान के नामचीन माफिया को छोड़ दिया जाये तो दूसरे पायदान पर लखनऊ के सलीम, सोहराब और रुस्तम भाईयों का नाम इसी तरह माफिया सूची में आ गया।

लखनऊ जेल में बंद खान मुबारक और संजीव माहेश्वरी के नाम भी प्रदेश की माफिया सूची में इसी तरह से शामिल हुए। इसमें अंकित गुर्जर, आकाश जाट, सिंह राज भाटी भी इसी तरह से सूचीबद्ध हुए।

एसटीएफ के नेटवर्क की नजर में रहने वाले माफियाओं में मुख्तार अंसारी के गुर्गे, सुंदर और अनिल भाटी के गुर्गे, सुशील मूंछ के गुर्गे आजकल राडार पर हैं। इसके अतिरिक्त विभिन्न जेलों में बंद माफिया जैसे फतेहगढ़ में बंद सुभाष ठाकुर, बरेली जेल में बबलू श्रीवास्तव, गौतमबुद्धनगर जेल में अमित कसाना पर भी एसटीएफ की नजर है। सूत्रों की मानें तो अगले ऑपरेशन में एसटीएफ प्रदेश के नामचीन अपराधियों की गुर्गो अंकुश लगाने की तैयारी में जुट चुका है। सूबे में कानून व्यवस्था को कायम रखने के लिए एसटीएफ की माफियाओं पर खास नजर है। सूत्र बताते हैं कि अब एसटीएफ से माफियाओं के गुर्गे बच नहीं सकेंगे।