लखनऊ (NNI Live) :- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को कैप्टन मनोज पाण्डेय उत्तर प्रदेश सैनिक स्कूल की स्थापना दिवस के ‘हीरक जयंती’ कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि मैं मातृभूमि के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले उन सभी जवानों को कोटि-कोटि नमन करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं, जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने आपको बलिदान कर दिया।

सैनिक स्कूल विभिन्न क्षेत्रों में नए-नए प्रतिमान कर रहा स्थापित 

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के इस अवसर पर मैं उत्तर प्रदेश सैनिक स्कूल की स्थापना के शिल्पी पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. संपूर्णानंद को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं, जिन्होंने देश के पहले सैनिक स्कूल की आधारशिला रखी। उत्तर प्रदेश का यह सैनिक स्कूल विभिन्न क्षेत्रों में नए-नए प्रतिमान स्थापित कर रहा है। प्रशासन, चिकित्सा, रक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टतम अधिकारी और अच्छे सैनिक देकर गौरवान्वित हो रहा है। सैनिक स्कूल, मातृभूमि की रक्षा के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि अगर हम लोग किसी व्यक्ति के जीवन की बात करें तो साठ साल की आयु उस व्यक्ति के कार्यकाल की प्रौढ़ावस्था होती है, जो बात किसी व्यक्ति के जीवन में अक्षरशः सही बैठती है, वही बात संस्था के लिए भी अक्षरशः सही बैठती है।

कैप्टन मनोज पाण्डेय इस विद्यालय की विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा

उन्होंने कहा कि कारगिल युद्ध के समय जब पाकिस्तान की सेना ने भारत भूमि में घुसने का दुस्साहस किया था और देश पर जबरन एक युद्ध थोपने का कुत्सित प्रयास हुआ था, उस समय भी हमारे बहादुर जवानों ने दुश्मन की सेनाओं को भारत भूमि से खदेड़ दिया था। हमारे सैनिकों ने दुश्मन को घुटने टेकने पर मजबूर कर किया था, सैनिकों का पराक्रम देश ने देखा और महसूस किया है। कैप्टन मनोज पाण्डेय इस विद्यालय की उसी विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

सैन्य स्कूल क्षमता के विस्तार की कार्रवाई को आगे बढ़ाया

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब मेरी पार्टी ने उत्तर प्रदेश में सत्ता संभालने का सौभाग्य मुझे दिया, तब से देश के इस पहले सैनिक स्कूल के बारे में कुछ करने का भाव मेरे मन में था। हम लोगों ने इसकी क्षमता के विस्तार की कार्रवाई को आगे बढ़ाया है। साथ ही हमारे लिए यह भी महत्वपूर्ण था कि देश के इस पहले सैनिक स्कूल में हम बालिकाओं के प्रवेश की भी व्यवस्था करें।

उन्होंने कहा कि मुझे प्रसन्नता है कि आज यहां पर बालिकाओं के प्रवेश का तृतीय सत्र चल रहा है। बालक और बालिकाओं में हम भेद नहीं करेंगे, बल्कि जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में उनके योगदान से सुरक्षा, समृद्धि व लोक कल्याण का मार्ग प्रशस्त करेंगे। यह भाव भी हम सबको आज दिखाई दे रहा है।

2021 में हीरक जयंती के समापन कार्यक्रम में राष्ट्रपति को करें आमंत्रित

उन्होंने कहा कि सैनिक स्कूल ने देश को अनेक विभूतियां दी हैं। देश की रक्षा के बहुत बड़े अभियान का हिस्सा यह सैनिक स्कूल रहा है। देश की रक्षा सेनाओं में अनेक पदों को सुशोभित करने वाले हमारे सैनिक अधिकारी भी यहां पर उपस्थित हैं। इनकी उपस्थिति इस हीरक जयंती कार्यक्रम को और भी गौरवान्वित करती है। हमारा प्रयास हो कि हम 2021 में हीरक जयंती के समापन कार्यक्रम में राष्ट्रपति जी को आमंत्रित करें।

सैनिक स्कूल की श्रृंखला को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाना जरूरी

उन्होंने कहा कि किसी भी देश के भविष्य को हम कहां ले जाना चाहते हैं अगर यह तय करना है तो उस देश के युवाओं की भावनाओं को देखकर हम अंदाजा लगा सकते हैं। युवाओं के जीवन में अनुशासन बहुत महत्वपूर्ण है। मेरा मानना है कि सैनिक स्कूल उसका बहुत सशक्त माध्यम हो सकता है। इसलिए हमें सैनिक स्कूल की श्रंखला को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाना चाहिए।

डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से सैनिक स्कूल से छात्र-छात्राएं कार्यक्रम से जुड़े

मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश सैनिक स्कूल के प्रशासन को कोविड-19 वैश्विक महामारी के कालखंड में भी इस कार्यक्रम का आयोजन करने के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि मैं जानता हूं कि आज हीरक जयंती के इस कार्यक्रम में स्कूल से जुड़े सभी छात्र-छात्राओं की उपस्थिति में जितना भव्य कार्यक्रम हो सकता था, उतना भव्य कार्यक्रम नहीं हो पा रहा है। लेकिन, डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से इस सैनिक स्कूल से जुड़े सभी छात्र-छात्राएं किसी न किसी रूप में हमारे साथ आज यहां जुड़े हैं। पूरे वर्ष कौन-कौन से कार्यक्रम होंगे, इसकी रूपरेखा भी प्रस्तुत की गई है।

सैनिक स्कूल की योजनाएं को शासन स्तर पर देंगे मंजूरी

मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि देश के इस पहले सैनिक स्कूल के सर्वांगीण विकास के प्रति किसी प्रकार की कोई कोताही नहीं होने दी जाएगी। न ही किसी प्रकार की कोई लापरवाही बरतने देगी। क्योंकि वह स्वयं भी समय-समय पर इसकी समीक्षा करता हैं कि कौन सा कार्य कहां पर रुका हुआ है और प्राथमिकता के आधार पर उन कार्यों को आगे बढ़ाते हैं ताकि यह सैनिक स्कूल देश के लिए एक रोल मॉडल बन सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस दृष्टि से इसके विकास के लिए जो भी योजनाएं सैनिक स्कूल की ओर से शासन के स्तर पर प्रस्तुत होंगी, प्रदेश सरकार इसमें पूरी मदद करेगी।

पूर्व और वर्तमान सैनिकों से स्कूल से जुड़ने की अपील

उन्होंने कहा कि 60 वर्ष के इस कालखंड के मूल्यांकन का भी अवसर हमें यह हीरक जयंती का अवसर उपलब्ध करवा रहा है। हमने क्या पाया है? और क्या खोया है? कैसे हम और बेहतर कर सकते हैं। मैं चाहूंगा कि यहां से निकले हुए पूर्व और वर्तमान सैनिक, प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े हुए अधिकारीगण व समाजसेवी, सभी आत्मिक भाव के साथ इस सैनिक स्कूल से जुड़ें। हमारा दायित्व बनता है कि हम सब एक कड़ी के रूप में जुड़ें ताकि राष्ट्ररक्षा, समाजसेवा या किसी भी प्रकार की आपदा या विपत्ति का सामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार हो सकें।

हीरक जयंती वर्ष का स्कूल के लोगोका किया अनावरण

इस मौके पर मुख्यमंत्री ने हीरक जयंती वर्ष का स्कूल के ‘लोगो’ का अनावरण किया। उन्होंने हीरक जयंती पर जारी विशेष कवर का भी विमोचन किया। इससे पहले सैनिक स्कूल की स्मृतिका पर शहीदों को नमन किया। स्कूल के प्रिंसिपल कर्नल यूपी सिंह ने उनको स्मृति चिह्न प्रदान किया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर कैप्टन मनोज पाण्डेय उत्तर प्रदेश सैनिक स्कूल के हीरक जयंती समारोह के कार्यक्रमों को आज से वर्षभर गरिमापूर्ण ढंग से मनाया जाएगा। इस दौरान देश के सैन्य इतिहास की महत्वपूर्ण तारीखों के दृष्टिगत सैनिकों के शौर्य व सम्मान के प्रतीक स्वरूप कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिससे स्कूल के बच्चे देश की संस्कृति, विरासत, शौर्य व पराक्रम से अच्छी तरह परिचित हो सकें।

उल्लेखनीय है कि कैप्टन मनोज कुमार पाण्डेय उप्र सैनिक स्कूल को देश के प्रथम सैनिक स्कूल होने का गौरव प्राप्त है। देश के किसी भी सैनिक स्कूल के छात्र कैडेट को आज तक वीरता का सर्वोच्च पदक परमवीर चक्र नहीं मिला है। यह कीर्तिमान उप्र सैनिक स्कूल के छात्र कैडेट रहे बलिदानी कैप्टन मनोज पांडेय के नाम दर्ज है। इनको कारगिल युद्ध में उनके शौर्य के लिए परमवीर चक्र (मरणोपरांत) प्रदान किया गया था। बाद में उनका नाम पर इस स्कूल का नाम कैप्टन मनोज पाण्डेय उत्तर प्रदेश सैनिक स्कूल कर दिया गया।