मुंबई (NNI Live) :- कोरोना वायरस महामारी के कारण, भारत सहित पूरी दुनिया के सभी देश बहुत मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। इस घातक वायरस के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए 22 मार्च 2020 से सभी यात्री ट्रेनों का परिचालन बंद कर दिया गया और भारत सरकार द्वारा राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन की घोषणा की गई। बाद में प्रवासी मजदूरों और उनके परिवारों को उनके गृहनगर तक पहुंचाने के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेनों का परिचालन शुरू किया गया। इसी क्रम में यात्रियों की सुविधा के लिए, भारतीय रेलवे ने 12 मई, 2020 से 15 जोड़ी राजधानी टाइप विशेष ट्रेनों के साथ चरणबद्ध तरीके से यात्री सेवाओं को बहाल करने का निर्णय लिया और 1 जून, 2020 से 100 जोड़ी विशेष रेलगाड़ियां चलाई गईं। अन्य सभी नियमित ट्रेनों को रद्द कर दिया गया। नियमित ट्रेनों के लिए आईआरसीटीसी वेबसाइट के माध्यम से बुक किये गये ट्रेन टिकटों को ऑनलाइन निरस्त कर तदनुसार रिफंड अदा कर दिया गया, जबकि पीआरएस काउंटरों के माध्यम से अपने टिकट बुक कराने वाले यात्रियों के लिए रिफंड अदायगी हेतु कुछ प्रमुख स्टेशनों पर 27 मई, 2020 से चुनिंदा काउंटर शुरू किये गये।

उल्लेखनीय है कि यात्री अपनी यात्रा की तारीख से 180 दिनों के भीतर रिफंड का लाभ उठा सकते हैं। यात्रियों को बिना किसी निरस्तीकरण शुल्क के टिकट राशि की पूर्ण वापसी दी जा रही है। साथ ही रिफंड के लिए 180 दिन की विशेष छूट दी जा रही है, ताकि यात्री रद्द की गई ट्रेनों के टिकटों के रिफंड के लिए जल्दबाजी न करें और वर्तमान परिदृश्य पर विचार करते हुए सामाजिक दूरी के मानदंडों और स्वास्थ्य प्रोटोकॉल का बखूबी पालन करते हुए भीड़भाड़ और संक्रमण से बचे रहें।

पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी सुमित ठाकुर के अनुसार, कोरोना वायरस के कारण पश्चिम रेलवे पर कमाई का कुल घाटा 1770.18 करोड़ रुपये रहा है, जिसमें उपनगरीय खंड के लिए 260.69 करोड़ रुपये और गैर-उपनगरीय के लिए लगभग 1509.49 करोड़ रुपये का नुकसान शामिल है। इस नुकसान के बावजूद यात्रियों को पूर्ण रिफंड वापसी दी जा रही है, जिससे उनकी कठिनाइयों को कम किया जा सके। 1 मार्च, 2020 से 11 जुलाई, 2020 तक टिकटों के निरस्तीकरण के कारण, पश्चिम रेलवे ने 397.13 करोड़ रु. की रिफंड राशि की अदायगी सुनिश्चित की है। गौरतलब है कि इस रिफंड राशि में, अकेले मुंबई डिवीजन ने 189.70 करोड़ रुपये से अधिक का रिफंड सुनिश्चित किया है। अब तक, 61.01 लाख यात्रियों ने पूरी पश्चिम रेलवे पर अपने टिकट रद्द कर दिये हैं और तदनुसार उनकी रिफंड राशि प्राप्त की है।

पश्चिम रेलवे की पार्सल और मालवाहक ट्रेनों से अत्यावश्यक सामग्री का परिवहन : कोरोना महामारी के प्रतिकूल प्रभावों के बावजूद, 23 मार्च से 17 जुलाई, 2020 तक, पश्चिम रेलवे द्वारा अपनी 405 पार्सल विशेष गाड़ियों के माध्यम से 78,000 टन से अधिक वजन वाली वस्तुओं का परिवहन किया गया है, जिनमें कृषि उपज, दवाइयां, मछली, दूध आदि मुख्य रूप से शामिल हैं। इस परिवहन के माध्यम से, लगभग 24.81 करोड़ रुपये की आय हुई है। इस अवधि के दौरान, पश्चिम रेलवे द्वारा 59 मिल्क स्पेशल ट्रेनें चलाई गईं, जिनमें 44 हजार टन से अधिक का भार था और वैगनों के 100 % उपयोग से लगभग 7.66 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। इसी तरह, 335 कोविड -19 विशेष पार्सल गाड़ियां लगभग 29 हजार टन भार के साथ विभिन्न आवश्यक वस्तुओं के परिवहन के लिए चलाई गईं, जिनके माध्यम से अर्जित राजस्व 14.79 करोड़ रुपये रहा। इनके अलावा, 4700 टन भार वाले 11 इंडेंटेड रेक भी लगभग 100% उपयोग के साथ चलाये गये, जिनसे 2.36 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ।

22 मार्च से 17 जुलाई, 2020 तक लॉकडाउन अवधि के दौरान 19.09 मिलियन टन आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति के लिए पश्चिम रेलवे द्वारा मालगाड़ियों के कुल 9430 रेकों का उपयोग किया गया है। 18,508 मालगाड़ियों को अन्य जोनल रेलों के साथ इंटरचेंज किया गया, जिनमें 9240 ट्रेनों को सौंप दिया गया और 9268 ट्रेनों को अलग-अलग इंटरचेंज पॉइंटों पर ले जाया गया। 18 जुलाई, 2020 को पश्चिम रेलवे के विभिन्न स्टेशनों से दूध के एक रेक सहित तीन पार्सल विशेष ट्रेनें रवाना हुईं, जिनमें बांद्रा टर्मिनस से जम्मू तवी और कांकरिया से कटक तक विशेष ट्रेनें शामिल हैं। दूध की एक विशेष ट्रेन पालनपुर से हिंद टर्मिनल के लिए रवाना हुई।