देहरादून (NNI Live) :- उत्तराखंड में पिछले एक सप्ताह में जहां कोरोना संक्रमित मरीजों की पॉजिटिव रिपोर्ट आने की तादाद में रिकार्ड इजाफा हुआ है, वहीं जांच की बाट जोह रहे कोरोना सैम्पलों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। हालात यह है कि जांच का इंतजार में पड़े सैम्पलों की संख्या 11 हजार के पार पहुंच गई है।

राज्य सरकार कोरोना सैम्पलों की जांच बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इस दिशा में व्यापक स्तर पर काम भी हुआ है। प्रदेश में मौजूदा समय में 10 सरकारी और निजी लैब हैं, जहां पर कोरोना के टेस्ट किए जा रहे हैं। राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी, देहरादून और श्रीनगर (गढ़वाल) में 24×7 जांच सुविधा है। इसके बावजूद औसतन रोजाना दो से ढाई हजार के करीब सैम्पलों की जांच रिपोर्ट प्राप्त हो पा रही है। मिसाल के तौर पर मंगलवार को 2348 सैम्पल की जांच हुई, जिनमें 2138 सैम्पल की जांच रिपोर्ट निगेटिव और 210 सैम्पल की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव प्राप्त हुई है। हालांकि मंगलवार को ही 3875 सैम्पल जांच के लिए भी भेजे गए। राज्य के कोविड 19 कंट्रोल रूम की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में मंगलवार शाम तक 11,077 सैम्पल कोरोना जांच के लिए टेस्टिंग की इंतजार में थे।

सरकार के तमाम प्रयास के बावजूद जांच के लिए भेजे जाने वाले सैम्पलों का बैकलाग बढ़ता ही जा रहा है। उत्तराखंड में कोरोना की जांच राष्ट्रीय औसत से तकरीबन 10 फीसद कम है। राज्य में मंगलवार की शाम तक कोरोना पॉजिटिव मरीजों की कुल संख्या संख्या भी 4849 हो गई है। हालांकि इनमें से 3297 मरीज स्वस्थ होने के बाद अस्पतालों से डिस्चार्ज होकर अपने घरों को जा चुके हैं लेकिन अभी भी राज्य में कोरोना के 1459 एक्टिव मरीज विभिन्न अस्पतालों में उपचाराधीन हैं। इनमें तकरीबन 1000 मरीज पिछले एक सप्ताह के दौरान पॉजिटिव आए हैं। लोगों का कहना है कि इन हालात में अगर जांच की बाट जोह रहे 11077 सैम्पलों की भी जांच हो जाती तो कोरोना मरीजों की तादाद और बढ़ना तय था। इसलिए सैम्पल की जांच के बढ़ते बैकलॉग को लेकर भी लोगों के जेहन में तरह-तरह के डरावने सवाल उठ रहे हैं।

राज्य में अगर जिलावार सैम्पल के बैकलॉग देखें तो सर्वाधिक बदतर स्थिति ऊधम सिंह नगर जनपद की है, जहां पर मंगलवार शाम तक 2,601 सैम्पल जांच की इंतजार में थे। उसके बाद हरिद्वार (2,100), अल्मोड़ा (1,377), पिथौरागढ़ (1,343) और पौड़ी (1,040) का नम्बर आता है, जहां के सैम्पलों की बैकलॉग संख्या चार अंकों में है। इनके अलावा बागेश्वर जिले में  349, चमोली में 223, चंपावत में 293, देहरादून में 464, नैनीताल में 565, रुद्रप्रयाग में 214, टिहरी में 258 और उत्तरकाशी में 250 सैम्पलों का बैकलॉग है। हालांकि अगर सरकारी आंकड़ों को गौर से देखा जाए तो कोविड 19 कंट्रोल रूम की सरकारी रिपोर्ट में बागेश्वर और रुद्रप्रयाग जिले में कोरोना का एक भी एक्टिव केस नहीं है लेकिन इन्हीं दोनों जिलों में क्रमशः 349 और 214 सैम्पल लैब में जांच की बाट जोह रहे हैं।

राज्य में मौजूदा समय में कोरोना के 1459 एक्टिव मरीज विभिन्न अस्पतालों में उपचाररत हैं। इनमें सर्वाधिक 437 एक्टिव मरीजों के साथ हरिद्वार शीर्ष पर है। उसके बाद क्रमशः ऊधम सिंह नगर (351), देहरादून (320) और नैनीताल (198) हैं। अन्य जिलों में अल्मोड़ा में 17, चमोली में चार, चंपावत में 17, पौड़ी में 18, पिथौरागढ़ में 13, टिहरी में 41 और उत्तरकाशी में 43 एक्टिव मरीज हैं।

क्या कहते है जिम्मेदार

राज्य के अपर सचिव (स्वास्थ्य) युगल किशोर पंत ने कहा. “सरकारी लैब के अलावा निजी लैब को भी जांच के लिए सैम्पल भेजे जा रहे हैं। पहले के मुकाबले सरकारी लैब में सैम्पल जांचने की रफ्तार बढ़ाई गई है। अब प्रत्येक मेडिकल कॉलेज की सरकारी लैब में 500 से अधिक सैम्पल की जांच की जा रही है। आईसीएमआर की गाइड लाइन के अनुसार जो लोग कोरोना होने की संदिग्ध कैटेगरी में आते हैं, उनकी भी सैम्पलिंग की जा रही है, इसलिए सैम्पल लेने की गति तेज हुई है। इस तरह सैम्पल लेने और जांच करने, दोनों की गति में तेजी आई है और उम्मीद करनी चाहिए कि जल्द ही यह बैकलॉग क्लियर हो जाएगा।”