नई दिल्ली (NNI Live) :- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को देशवासियों को आगामी त्योहारों की शुभकामना देते हुए कहा कि एक तरफ देश में कोरोना संकट काल में लोग अपनी सृजनात्मक प्रतिभा दर्शा रहे हैं तो दूसरी ओर देशवासियों को त्योहारों में स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देने की प्रेरणा दे रहे हैं। इस दौरान प्रधानमंत्री ने 7 अगस्त को ‘हैंडलूम दिवस’ का जिक्र करते हुए कहा कि भारतीय हस्तनिर्मित उत्पादों की विविधता का प्रचार करके हमें देश के कारीगरों को लाभ पहुंचाया जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में कहा, “अभी कुछ दिन बाद रक्षाबंधन का पावन पर्व आ रहा है। मैं, इन दिनों देख रहा हूं कि कई लोग और संस्थायें इस बार रक्षाबंधन को अलग तरीके से मनाने का अभियान चला रहे हैं। कई लोग इसे वोकल फॉर लोकल से भी जोड़ रहे हैं जो सही है। हमारे पर्व से हमारे समाज के, हमारे घर के पास ही किसी व्यक्ति का व्यापार बढ़े, उसका भी पर्व खुशहाल हो, तब पर्व का आनंद कुछ और ही हो जाता है। सभी देशवासियों को रक्षाबंधन की बहुत-बहुत शुभकामनाएं।”

इस दौरान प्रधानमंत्री ने कोरोना संकट काल में लोगों द्वारा किए गए अभिनव प्रयोगों का जिक्र किया और बताया कि कैसे विपत्ति को अवसर में बदला जा सकता है। उन्होंने कहा, “सही व सकारात्मक सोच से हमेशा आपदा को अवसर और विपत्ति को विकास में बदलने में बहुत मदद मिलती है। अभी हम कोरोना के समय भी देख रहे हैं कि कैसे हमारे देश के युवाओं-महिलाओं ने अपनी योग्यता और कौशल के दम पर कुछ नये प्रयोग शुरू किये हैं।” इस दौरान प्रधानमंत्री ने मधुबनी स्वयं सहायता समूह की ओर से बनाए जा रहे मास्क, उत्तर पूर्व में लोगों द्वारा बनाए जा रहे पर्यावरण हितैशी बांस से बनने वाले उत्पादों, लद्दाख में होने वाली खुबानी की खेती, कच्छ में किसानों की ओर से की जा रही ड्रेगन फ्रूट की खेती और बिहार में मोती की खेती का उदाहरण के तौर पर जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इससे देश आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ेगा।

प्रधानमंत्री ने इस दौरान कोरोना काल में ही 15 अगस्त को आ रहे देश के स्वतंत्रता दिवस का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस दौरान हमें संकल्प लेना चाहिए कि हम आत्मनिर्भर बनेंगे और सीखने-सिखाने की परंपरा को निभायेंगे। उन्होंने एक अगस्त को आने वाली लोकमान्य तिलक की जयंती का भी जिक्र कर देशवासियों को स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका निभाने वाले कांतिकारियों से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।