हमीरपुर :- सीमा में भारत चीन में तनातनी को लेकर यहां जनपद के पूर्व सैनिकों में चीन से दो-दो हाथ करने के लिये आक्रोश देखा जा रहा है। वर्ष 1962 की जंग में अपने बड़े भाई की जान गंवाने वाले एक पूर्व सैनिक ने कहा कि चीन के तत्कालीन प्रधानमंत्री चामुन लाई जैसे ही भारत की यात्रा करने के बाद अपने देश लौटे तो कुछ ही दिन बाद चीन भारतीय सैनिकों पर पीछे से हमला कर दिया गया था। उस समय हमारे देश के सैनिकों के पास हथियार भी कमजोर थे लेकिन अब देश की सेना हथियारों से मजबूत है, इसलिये चीन चाहकर भी सीधे भारत से युद्ध नहीं कर सकता है।

जिले के मझगवां थाना क्षेत्र के मलेहटा गांव निवासी हरी सिंह 16 राजपूत रेजीमेंट में हवलदार रहे हैं। इन्होंने वर्ष 1965 और 1971 की जंग में ऑपरेशन कैक्सटस लिली में भाग लिया था। दुश्मन की गोलीबारी से ये विकलांग हो गये और इस समय अपने गांव में ही परिवार के साथ रह रहे हैं। इनके पिता शिव पाल सिंह भी भारतीय सेना में थे जिन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध में हिस्सा लिया था। वह अट्ठारह दिन बाद अपने कैम्प में लौटे थे। शिवपाल सिंह के पुत्र प्रकाश सिंह भी भारत-चीन युद्ध में शहीद हुये थे। जनपद के राठ कस्बे के सिकन्दरापुरा मुहाल निवासी रामनिवास सिंह ने भी वर्ष 1962 में भारत चीन युद्ध के दौरान गोलीबारी में अपनी दोनों टांगे गंवाई थी। पूर्व सैनिक हरी सिंह समेत अन्य सैनिकों ने कहा कि ये भारत अब 2020 का है जिसका दुनिया के तमाम देश लोहा मानते हैं। उन्होंने कहा कि धोखे से वार करने वाला चीन मौजूद समय में भारत से सीधे तौर पर टकराने की हिम्मत नहीं करेगा।

शहादत के बाद परिजनों ने लौटाया था सम्मान
पूर्व सैनिक हरी सिंह ने बताया कि बड़े भाई प्रकाश सिंह 1962 में भारत चीन की जंग में शहीद हुये थे। उस समय हमीरपुर से जिला मजिस्ट्रेट घर आये थे। उन्होंने मुख्यमंत्री की तरफ से पांच सौ रुपये व एक टुकड़ा मारकीन का कपड़ा सम्मान के तौर पर दिया था लेकिन इसे लौटा दिया गया था। उन्होंने बताया कि शहीद की भतीजी रमा ने 51 रुपये अपने पास से मिलाकर प्रशासन को पांच सौ रुपये ये कहकर लौटा दिये थे कि इसे सैनिक रक्षा कोष में दान कर दे। शहीद के परिजनों का ये जज्बा देख अधिकारी भी दंग रह गये थे। पूर्व सैनिक व शहीद प्रकाश सिंह की पत्नी उर्मिला देवी ने बताया कि आज तक किसी भी तरह की कोई सहायता नहीं मिली है।
दलाईनामा का भारत में स्वागत करने से बौखलाया था चीन
पूर्व सैनिक हरी सिंह ने बताया कि जवाहर लाल नेहरू के कार्यकाल में दलाईनामा का भारत आने पर जोरदारी से स्वागत किया गया था, इसीलिये चीन भारत से चिढ़ता है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1962 में चीन के मुकाबले भारत के सैनिक ठीक से प्रशिक्षित नहीं थे और न ही उनके हथियार दमदार थे। इसीलिये चीन से जंग में भारत के सैनिकों को मात मिली थी। मौजूदा समय में भारतीय फौज आधुनिक हथियार और अन्य सैन्य सुविधाओं से मजबूत हुई है, इसीलिये भारत से सीधे तौर पर कोई भी देश टकराने का दुस्साहस नहीं करेगा।
नेहरू सरकार में भारतीय सैनिकों को चुकानी पड़ी थी कीमत
पूर्व सैनिक हरी सिंह ने बताया कि जवाहरलाल नेहरू के समय में चीन के तत्कालीन प्रधानमंत्री के भारत आने पर ‘हिन्दी चीनी भाई-भाई’ का नारा दिया गया था जिसे चीन ने कुछ ही समय बाद तार-तार कर दिया था। उन्होंने बताया कि चीन शुरू से ही भारत से चिढ़ता है। वह नहीं चाहता कि सीमा पर भारत कोई निर्माण कराये जबकि वह सीमा पर सड़कें और अन्य निर्माण कराता रहता है। उन्होंने कहा कि जवाहरलाल नेहरू देश के प्रधानमंत्री थे लेकिन चीन की हरकत को वह कभी समझ नहीं पाये। इसीलिये वर्ष 1962 के युद्ध में चीन ने भारतीय सैनिकों को बहुत बड़ा नुकसान पहुंचाया था। भारत के सैनिकों को भी पीछे हटना पड़ा था।